महाराज के सत्संग के अनुसार, रात को सोते समय एक उपासक को अत्यंत सावधान रहने की आवश्यकता होती है। महाराज जी बताते हैं कि अक्सर लोग सोते समय मोबाइल देखते हैं या सांसारिक प्रपंचों और गंदी चेष्टाओं का चिंतन करते हैं, जिससे न केवल उनकी रात बेकार जाती है, बल्कि उसका बुरा प्रभाव अगली सुबह और पूरे दिन पर भी पड़ता है।
सोते समय ध्यान रखने योग्य मुख्य बातें:
मोबाइल का त्याग: महाराज जी सलाह देते हैं कि जैसे ही आप अपने बिस्तर (शैया) पर जाएं, मोबाइल को पूरी तरह स्विच ऑफ कर दें। एकांत में मोबाइल देखना वासना और नकारात्मक चिंतन का द्वार खोलता है, जो परमार्थ के मार्ग में सबसे बड़ा बाधक है।
नाम जप में शयन: नींद में जाने के समय को ‘मृत्यु शैया’ पर जाने के समान समझना चाहिए। जागने से लेकर प्रगाढ़ निद्रा आने तक निरंतर नाम जप (जैसे ‘राधा-राधा’ या गुरु मंत्र) करते रहना चाहिए। यदि आप नाम जप करते हुए सोते हैं, तो नींद के 5-6 घंटे भी भजन में ही गिने जाएंगे।
अभ्यास का चमत्कार: महाराज जी अपना अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि यदि आप भजन करते हुए सोते हैं, तो जागते ही वही चिंतन पुनः शुरू हो जाता है। यह अभ्यास मन को संसार के व्यर्थ चिंतन से हटाकर प्रभु के चरणों में स्थिर कर देता है।
मन को फंसाने की तकनीक: जब मन एक ही नाम या मंत्र से ऊबने लगे, तो उसे प्रभु के विभिन्न पदों, लीलाओं या अन्य नामों में लगाना चाहिए। जैसे वीर योद्धा के पास विभिन्न अस्त्र होते हैं, वैसे ही उपासक के पास भी मन को वश में करने के लिए अलग-अलग नाम और पद होने चाहिए ताकि संसार का चिंतन न हो सके।
ब्रह्मचर्य का पालन: भगवत प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए ब्रह्मचर्य अनिवार्य है। महाराज जी कहते हैं कि इंद्रियों को विषयों से हटाकर प्रभु के अनुराग में लगाना ही सच्चा ब्रह्मचर्य है। जो इसका पालन करता है, उसके मुख पर कमल जैसी प्रसन्नता और तेज होता है, जबकि इसका उल्लंघन करने वाले का चेहरा तेजहीन और अशांत रहता है।
महाराज जी अंत में सावधान करते हैं कि अध्यात्म का मार्ग मन को दुलारने का नहीं, बल्कि उसे मारने और प्रभु के चरणों में समर्पित करने का है। यदि आप उच्च पदवी चाहते हैं, तो अपने आचरण को भी शुद्ध और सात्विक बनाना होगा।



