घर में छिपकली आती है तो मेरी ये बात ध्यान से सुन लो

अक्सर घरों में छोटे बच्चे खाना खाते समय थाली में कुछ भोजन जूठा छोड़ देते हैं, जिसे फेंकने के बजाय कई लोग घर के बाहर रख देते हैं ताकि अन्य जीव-जंतु उसे खा सकें। इस विषय पर पूज्य प्रेमानंद जी महाराज ने बहुत ही सुंदर और स्पष्ट मार्गदर्शन दिया है। उनका कहना है कि यदि अनजाने में या बच्चों द्वारा भोजन बच जाता है और उसे बाहर रखने पर कोई कुत्ता, पक्षी या अन्य पशु अपनी भूख मिटाता है, तो इसमें कोई दोष या अपराध नहीं है। भोजन को बेकार फेंकने या गाड़ने से कहीं बेहतर है कि वह किसी भूखे जीव के पेट में चला जाए।

हालाँकि, महाराज जी ने भोजन के प्रति सम्मान और संयम बरतने पर भी जोर दिया है। उनका सुझाव है कि हमें अपनी थाली में उतना ही भोजन परोसना चाहिए जितना हम खा सकें। भोजन की बर्बादी से बचने के लिए यह सबसे अच्छा तरीका है। यदि आपको पहले से ही आभास हो जाए कि भोजन अधिक है, तो उसे जूठा करने से पहले ही अलग निकाल कर रख देना चाहिए और फिर उसे पशु-पक्षियों को देना चाहिए। अपना जूठा किसी और को खिलाना उचित नहीं माना जाता, लेकिन बच्चों के मामले में, जो नासमझ हैं, उनके द्वारा छोड़े गए भोजन को जीवों को खिलाने में कोई पाप नहीं है।

अंततः, प्रेमानंद जी महाराज समझाते हैं कि जीवों की सेवा और उनकी भूख मिटाना एक पुण्य कार्य है। यदि आपके द्वारा बाहर रखा गया भोजन किसी प्राणी का आधार बनता है, तो मन में अपराध बोध रखने की आवश्यकता नहीं है। बस प्रयास यह होना चाहिए कि हम अन्न का आदर करें और परोसते समय सावधानी बरतें ताकि कम से कम भोजन बचे।

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