एल-नीनो और ला-नीना का भारत पर असर

एल-नीनो और ला-नीना का भारत पर असर

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साल 2026 के मानसून और गर्मी के मौसम को लेकर अपने शुरुआती संकेत और अनुमान जारी कर दिए हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मार्च से मई 2026 के बीच समुद्री स्थितियों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान में प्रचलित ‘ला-नीना’ (La Niña) की स्थिति से बदलकर ‘एल-नीनो न्यूट्रल’ (El Niño Neutral) यानी तटस्थ स्थिति में आने की उम्मीद है। यह बदलाव भारत के मानसून पैटर्न को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है, जिससे बारिश की मात्रा और वितरण में बदलाव संभव है।

गर्मी के मौसम की बात करें तो मार्च से मई 2026 के दौरान देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से पूर्वी, पूर्वी-मध्य और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक ‘हीट वेव’ (लू) चलने के दिन रहने की संभावना जताई गई है। तापमान में यह बढ़ोतरी आम जनजीवन के साथ-साथ कृषि कार्यों पर भी असर डाल सकती है, जिसके लिए समय रहते सावधानी बरतना जरूरी है।

मार्च 2026 के वर्षा पूर्वानुमान के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। हालांकि, पूर्वोत्तर भारत और उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। मध्य भारत, विशेषकर मध्य प्रदेश में मार्च के महीने में सामान्य से अधिक ओलावृष्टि और बेमौसमी बारिश पहले ही देखी जा चुकी है, जो 2026 में मौसम के अस्थिर रहने का एक बड़ा संकेत है।

मानसून 2026 के सटीक और विस्तृत पूर्वानुमान के लिए आने वाले महीनों की समुद्री और वायुमंडलीय स्थितियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। आईएमडी द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले अपडेट्स से किसानों और आम जनता को मौसम के बदलते मिजाज के अनुसार अपनी योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए खेती-किसानी से जुड़े कार्यों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।

Leave a Comment